SSC CGL Hindi Typing Test 40 - Cottage and Small Industries

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कुटीर और लघु उद्योग भारत जैसे विशाल और अधिक आबादी वाले विकासशील देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन की सबसे मजबूत और असली रीढ़ होते हैं। कुटीर उद्योग का सीधा सा अर्थ उन छोटे व्यवसायों और कारखानों से है जिन्हें लोग बहुत ही कम पूंजी और सीमित मशीनों के साथ सीधे अपने घरों या छोटे कमरों से बहुत ही आसानी से चलाते हैं। इनमें मुख्य रूप से मिट्टी के बर्तन बनाना, हाथ से कपड़े बुनना (हथकरघा), पापड़-अचार बनाना, अगरबत्ती बनाना, और हस्तशिल्प का शानदार काम शामिल है। भारत के ग्रामीण इलाकों में गरीबी और बेरोजगारी की भयंकर समस्या को जड़ से खत्म करने में ये छोटे उद्योग एक बहुत ही बड़ी और जादुई भूमिका निभा सकते हैं। महात्मा गांधी जी का भी हमेशा से यही मानना था कि भारत की असली और सच्ची आत्मा उसके छोटे गांवों में ही बसती है, और गांवों का पूर्ण विकास कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिए बिना बिल्कुल भी संभव नहीं है। बड़े और विशाल कारखाने बहुत अधिक पैसा लगाकर भी केवल कुछ ही लोगों को नौकरी दे पाते हैं, जबकि ये छोटे उद्योग लाखों गरीब और अनपढ़ कारीगरों को सम्मानजनक रोजगार प्रदान करते हैं। सरकार को इन छोटे कारीगरों को बहुत ही कम ब्याज पर कर्ज, अच्छी ट्रेनिंग, और उनके बेहतरीन उत्पादों को देश-विदेश में बेचने के लिए एक बहुत ही शानदार और बड़ा बाजार उपलब्ध कराना चाहिए।
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